अतीत में दबे पांव - Class 12th hindi ( वितान ) Term- 2 Important question

अतीत में दबे पांव - Class 12th hindi ( वितान )  Term- 2 Important question

 1- सिंधु घाटी सभ्यता में किन किन कृषि उपजों के उत्पादन के प्रमाण प्राप्त होते हैं ?  

सिंधु घाटी सभ्यता में अनेक प्रकार की कृषि उपजों के उत्पादन के प्रमाण प्राप्त हुए हैं यहाँ ज्वार और बाजरे की खेती होती थी यहाँ गेहूं की खेती भी होती थी कपास सरसों और चने की उपज के भी पुख्ता प्रमाण खुदाई में मिले हैं यहाँ के लोग खरबूजे खजूर और अंगूर भी उगाते थे | 

2- पुरातत्व के किन  चिन्हों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी  ? 

सिंधु सभ्यता की खुदाई जब हुई तब वह मिट्टी के बर्तन सिक्के मूर्तियां पत्थर और मिट्टी के उपकरण मिले थे | इन चीजों को मिलना यह बताता है कि वे लोग इन चीजों को प्रयोग में लाते थे सड़कों नालियों तथा गलियों को साफ सुथरा रखना उनकी समझदारी को दर्शाता है इससे यह प्रमाणित होता है कि सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा स्वत: अनुशासित सभ्यता थी |

3- सिंधु सभ्यता साधन संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था । कैसे ?   

सिंधु सभ्यता साधन संपन्न थी, फिर भी उसमें भव्यता का आडंबर या बनावटीपन जरा भी नहीं था अर्थात् यह आडंबरविहीन सभ्यता थी । यह सभ्यता हर प्रकार के साधनों से परिपूर्ण थी । सिंधु सभ्यता में निर्माण व्यवस्थित तरीके से किया गया तथा निर्माण शैली हर प्रकार से विस्तृत होने के बाद भी लोग दिखावे से बहुत दूर थे, क्योंकि जो वस्तु जिस रूप में सुंदर लगती थी, उसका निर्माण उसी ढंग से किया गया था । अत : यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि सिंधु सभ्यता आडंबर विहीन सभ्यता थी । 

4- सिंधु की सभ्यता पूर्ण विकसित मानव सभ्यता थीं, इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं और क्यों ?  

सिंधु की सभ्यता एक पूर्ण विकसित मानव सभ्यता थी, इस विचार से हम पूर्ण रूप से सहमत हैं । यह सभ्यता धर्मतंत्र या राजतंत्र की शक्ति का प्रदर्शन करने वाले महलों , उपासना स्थलों आदि का निर्माण नहीं करती , बल्कि यह सभ्यता समाज या मानव पोषित संस्था का समर्थन करती थी । इस सभ्यता में आडंबर ( दिखावा ) को स्थान नहीं दिया गया था , अपितु चारों ओर सुंदरता ही दिखाई देती थी । सभ्यता के केंद्र में समाज को प्रथम स्थान दिया गया है । इन्हीं बातों के आधार पर हम कह सकते हैं कि सिंधु की सभ्यता पूर्ण विकसित मानव सभ्यता थी । 

5- ' कला की दृष्टि से हड़प्पा सभ्यता समृद्ध थी ', पाठ के आधार पर सोदाहरण स्पष्ट कीजिए ।   

कला की दृष्टि से हड़प्पा सभ्यता अत्यंत समृद्ध थी । इस सभ्यता के लोगों में कला के प्रति समृद्ध दृष्टि तत्कालीन मनुष्यों की दैनिक प्रयोग की वस्तुओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है ; जैसे- वहाँ की वास्तुकला तथा नियोजन , धातु एवं पत्थर की मूर्तियाँ , मिट्टी के बर्तन एवं उन पर बने चित्र , वनस्पति एवं पशु - पक्षियों की छवियाँ, मुहरें, उन पर उत्कीर्ण आकृतियाँ, खिलौने, केश विन्यास, आभूषण, सुघड़ लिपि आदि तत्कालीन समय में विद्यमान हड़प्पा सभ्यता के सौंदर्यबोध को व्यक्त करती हैं ।  

6- " सिंधु सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य है , जो राजपोषित या धर्मपोषित न होकर समाजपोषित था । " ऐसा क्यों कहा गया ? 

यह सभ्यता धर्मतंत्र या राजतंत्र की शक्ति का प्रदर्शन करने वाले महलों, उपासना स्थलों आदि का निर्माण नहीं करती थी । सिंधु सभ्यता समाजपोषित संस्था का समर्थन करती थी । सभ्यता में आडंबर को स्थान नहीं दिया गया था , क्योंकि इस सभ्यता में राजमहलों , मंदिरों , समाधियों के अवशेष नहीं मिलते । ऐसी कोई मूर्ति उपलब्ध नहीं हुई, जिसमें विशालता एवं भव्यता व्याप्त हो । अपितु चारों ओर से सुंदरता ही दिखाई देती थी अर्थात् समाज में सौंदर्य बोध था , न कि कोई राजनीतिक या धार्मिक आडंबर । सभ्यता के केंद्र में समाज को प्रथम स्थान दिया गया है । इसमें न किसी राजा का प्रभाव था और न ही किसी धर्म विशेष का । इतना अवश्य है कि कोई - न - कोई राजा अवश्य रहा होगा, लेकिन यह सभ्यता राजा पर आश्रित नहीं थी । इन्हीं बातों के आधार पर हम कह सकते हैं कि सिंधु सभ्यता राजपोषित या धर्मपोषित न होकर पूरी तरह से समाजपोषित थी । 

7- मुअनजो - दड़ो का अनूठा नगर - नियोजन आधुनिक नगर - नियोजन के प्रतिमान नगरों से बेहतर क्यों है ? उदाहरणों के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।   

मुअनजोदड़ो की नगर योजना वास्तव में आज के नगर - नियोजन से अधिक बेहतर थी , क्योंकि मुअनजोदड़ो छोटे - मोटे टीलों पर आबाद था । ये टीले प्राकृतिक नहीं थे , बल्कि इन्हें कच्ची और पक्की दोनों तरह की ईंटों से धरती की सतह से ऊँचे उठाए गए थे , ताकि यदि सिंधु नदी का पानी बाहर फैल जाए , तो उससे शहर को बचाया जा सके । मुअनजोदड़ो की सड़कों और गलियों का विस्तार खंडहरों को देखकर किया जा सकता है । यहाँ हर सड़क सीधी है या फिर आड़ी है , जिसे वास्तुकार ' ग्रिड प्लान ' कहते हैं । चबूतरे ( गढ़ ) के पीछे उच्च वर्ग की बस्ती महाकुंड , स्नानागार , ढकी नालियाँ , अन्न का कोठार , सभा भवन , घरों की बनावट , भव्य राजप्रासाद , समाधियाँ आदि संरचनाएँ ऐसे सुव्यवस्थित हैं कि जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि शहर नियोजन से लेकर सामाजिक संबंधों तक में इसकी कोई तुलना नहीं है । हम कह सकते हैं कि वर्तमान की सेक्टर मार्का कॉलोनियों के नियोजन इनके सामने बिलकुल फीके हैं , जिसकी कॉलोनियों में आड़ा - सीधा ' नियोजन ' अधिक देखने को मिलता है । पहले की अपेक्षा आज के शहरों के नियोजन के नाम पर भी हमें अराजकता अधिक दिखाई पड़ती है । इसी कारण सेक्टर मार्का कॉलोनियों का रहन - सहन नीरस बना रहता है ।

8- ' अतीत में दबे पाँव ' पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए का उल्लेख कीजिए | 

सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से सिंधु सभ्यता के सामाजिक वातावरण को बहुत अनुशासित होने का अनुमान लगाया गया है । वहाँ का अनुशासन ताकत के बल पर नहीं था । नगर योजना , वास्तुशिल्प , मुहर , पानी या साफ़ - सफ़ाई जैसी सामाजिक व्यवस्था में एकरूपता से यह अनुशासन प्रकट होता है । सिंधु सभ्यता में सुनियोजित नगर थे , पानी की निकासी की व्यवस्था अच्छी थी । सड़कें लंबी व चौड़ी थीं , कृषि भी उन्नत थी , यातायात के साधन के रूप में बैलगाड़ी भी थी । हर नगर में मुद्रा , अनाज भंडार , स्नानगृह आदि थे तथा घरों एवं सड़कों के निर्माण कार्यों में पक्की ईंटों का प्रयोग होता था । सिंधु सभ्यता में प्रदर्शन या दिखावे की प्रवृत्ति नहीं है । यही विशेषता इसको अलग सांस्कृतिक धरातल पर खड़ा करती है । 

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