उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण- Class 12th ( Home science ) Chapter- 16th Term- 2

उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण- Class 12th ( Home science ) Chapter- 16th Term- 2

 ( Introduction )

  • उपभोक्ता वह व्यक्ति होता है जो वस्तुओं और सेवाओं को अपनी व्यक्तिगत ज़रूरतों की संतुष्टि के लिए खरीदता है ।
  •  उपभोक्ता किसी सामाजिक - आर्थिक तंत्र के प्राथमिक घटक होते हैं ।
  •  उपभोक्ता उत्पाद का अर्थ है ऐसी कोई भी वस्तु जिसे उपभोक्ता के व्यक्तिगत या परिवार के प्रयोग के लिए अपने घर में अथवा किसी संस्थान जैसे विद्यालय , अस्पताल , महाविद्यालय , कार्यालय आदि में अथवा व्यावसायिक उद्देश्य से निर्मित किया या बिक्री के लिए वितरित किया जाता है |  

( उपभोक्ता की समस्याएँ )    

  • कम स्तर की खराब गुणवत्ता वाली वस्तुएँ कई निर्माता खराब गुणवत्ता वाली वस्तुएँ बनाकर बेचते हैं । कई बार उनपर लगा लेबल भी उच्च गुणवत्ता वाली वस्तु की नकल होता है । ऐसा होने पर उपभोक्ता धोखा खा जाता है और उन्हें खरीद लेता है ।
  •  मिलावट मिलावट का अर्थ है किसी पदार्थ में निम्न स्तर का घटिया पदार्थ मिलाना या उसमें से कुछ अच्छा पदार्थ निकाल लेना । मिलावट जानबूझकर पैसा कमाने के लिए की जाती हैं , परन्तु कभी अनजाने में हो जाती है । मिलावटी पदार्थ स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालते हैं । जैसे हल्दी में मेटानिल पीला रंग , चाय पत्ती में लोहे का चूरा , दूध में पानी आदि ।  
  • अधिक कीमत कई बार एक ही वस्तु की कीमत अलग - अलग दुकानों पर भिन्न होती है । इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे बड़ी दुकानों के अतिरिक्त खर्चे , खरीदारी का स्थान , वस्तु की माँग , वितरण प्रणाली वस्तु की गुणवत्ता उपभोक्ता को ऐसा नहीं समझना चाहिए कि महँगी वस्तु ही अच्छी गुणवत्ता को होती है , उसे अच्छे से बाजार सर्वेक्षण करके कीमतों की तुलना करनी चाहिए और फिर वस्तु खरीदनी चाहिए । 

  • उपभोक्ता जानकारी का अभाव ज्यादातर उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और दायित्वों की जानकारी नहीं होती । इसलिए वे इतनी समस्याओं का सामना करते हैं ।
  • अधिकांश वस्तुओं पर लगे लेबल अपूर्ण होते हैं , वे सम्पूर्ण जानकारी नहीं देते । कुछ लेबल बड़ी कम्पनियों की नकल होते हैं , इसलिए उपभोक्ता को धोखा देते हैं । उपभोक्ता के लिए वस्तु की जानकारी प्राप्त करने का दूसरा साधन विज्ञापन होते हैं । परन्तु अधिकांश विज्ञापन पूरी जानकारी नहीं देते । कुछ विज्ञापन भ्रामक भी होते हैं , वस्तु की गुणवत्ता को बढ़ा - चढ़ाकर बताते हैं । जैसे क्रीम , शैम्पू आदि के विज्ञापन ।

( उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण का महत्त्व )  

  • हर व्यक्ति को एक समझदार उपभोक्ता बनाने में उपभोक्ता शिक्षा का बड़ा महत्त्व है । उचित उपभोक्ता शिक्षा के द्वारा उपभोक्ता की तर्क शक्ति का विकास होता है जिसके चलते ही वह उत्पादकों एवं विक्रेताओं की कुचालों से स्वयं को बचा पाता है ।
  • एक उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा तभी कर सकता है जब उसे एक खरीदार के रूप अपने अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का पूर्ण ज्ञान हो । अर्थात् उपभोक्ता शिक्षा ही व्यक्ति को एक कुशल और जागरूक उपभोक्ता बनाना सिखाती है ।
  •  उचित उपभोक्ता शिक्षा ग्राहकों को स्वयं के लिए सही उत्पाद के चयन , सही मूल्य पर क्रय तथा विक्रेताओं की कुचालों से बचने में मदद करती है । 
  • उपभोक्ता शिक्षा ग्राहकों को बाजार से संबंधित जरूरी जानकारी प्रदान करती है , जैसे कि- खरीददारी के विभिन्न स्रोत , कौन - सा उत्पाद कौन - सी जगह से खरीदने पर सबसे बेहतर दाम पर उपलब्ध हो सकता है , कौन - सी दुकान विश्वसनीय उत्पाद उपलब्ध कराती है , इत्यादि ।
  • उपभोक्ता शिक्षा उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बनाए गए विभिन्न प्रकार के मानकीकृत चिह्नों के विषय में ज्ञान एवं जानकारी प्रदान करते है । उपभोक्ता शिक्षा के माध्यम से ही उपभोक्ताओं को उनके हितों से जुड़े विभिन्न कानूनों और प्रावधानों के विषय में जानकारी प्राप्त होती है | 

( Basic concepts )     

  • उपभोक्ता उत्पाद ( Consumer Product ) ऐसी कोई भी वस्तु जिसे उपभोक्ता के व्यक्तिगत या परिवार के प्रयोग के लिए अपने घर में अथवा किसी संस्थान जैसे कि विद्यालय , अस्पताल , महाविद्यालय , कार्यालय आदि में अथवा व्यावसायिक उद्देश्य से निर्मित किया या बिक्री के लिए वितरित किया जाए , उपभोक्ता उत्पाद कहलाता है ।
  •  उपभोक्ता व्यवहार ( Consumer Behaviour ) : किसी खरीदार द्वारा किसी वस्तु या सेवा के क्रय के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया को उपभोक्ता व्यवहार कहते है । 
  • उपभोक्ता फोरम ( Consumer Forum ) : वह स्थान या संगठन जहाँ उपभोक्ता , उपभोक्ता उत्पादों , सेवाओं और उनके लाभ तथा हानियों के विषय में चर्चा कर सकते हैं , उपभोक्ता फोरम कहलाता है । 
  • उपभोक्ता आगमन संख्या ( Consumer Footfalls ) : किसी विशेष स्थान , जैसे कि किसी दुकान , स्टोर अथवा किसी मॉल में एक दिन में आने वाले उपभोक्ताओं अथवा ग्राहकों की कुल संख्या को उपभोक्ता आगमन संख्या कहते है ।
  • उपभोक्ता की अपेक्षाएँ ( Consumer Expectations ) : उपभोक्ता अपेक्षाओं का तात्पर्य उपभोक्ता की उन उम्मीदों से है जिनके चलते वह कोई उत्पाद अथवा सेवा खरीदता है ।

( उपभोक्ता अधिकार ) 

  • सुरक्षा का अधिकार- इसका अर्थ है उपभोक्ता को अपने स्वास्थ्य / जीवन को होने वाले हानिकारक प्रभाव से सुरक्षित किए जाने का अधिकार है । उपभोक्ता को ऐसे उत्पादों , उत्पादन प्रक्रियाओं और सेवाओं से सुरक्षा का अधिकार है जो स्वास्थ्य या जीवन के लिए हानिकारक हों ।
  •  सुचित किए जाने का अधिकार- इसका अर्थ है कि उपभोक्ता को हर वस्तु और सेवा की गुणवत्ता , मात्रा , क्षमता , शुद्धता और मूल्य की जानकारी पाने का अधिकार है ताकि वह व्यापार के अनुचित तरीकों से अपने आप को बचा सके ।  
  • चयन का अधिकार- इसका अर्थ है कि उपभोक्ता को विभिन्न गुणवत्ता , मात्रा , कीमत , माप और डिज़ाइन के उत्पाद मिलने चाहिए । उपभोक्ता उनमें से अपनी इच्छा व आवश्यकता के अनुसार चयन कर सकता है । 
  • सुने जाने का अधिकार इसका अर्थ है उपभोक्ताओं के हितों पर उपयुक्त मंचों पर उचित विचार - विमर्श किया जाए । इसमें उपभोक्ता कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे विभिन्न मंत्रों से प्रस्तुत किए जाने का अधिकार भी शामिल हैं ।
  • शिकायत निवारण प्राप्त करने का अधिकार इसका अर्थ है उपभोक्ता को व्यापार के अनुचित तरीकों के विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार है । अगर कोई उपभोक्ता का शोषण करता है , दोषपूर्ण वस्तुएँ या सेवाएँ प्रदान करता है , तो उपभोक्ता उसकी शिकायत कर सकता है और क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकता है ।
  •  उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार- इसका अर्थ है कि प्रत्येक उपभोक्ता को शिक्षा का अधिकार है ताकि वह शोषण से बच सके और अपनी समस्याओं का समाधान कर सके । उसे जानकार उपभोक्ता होने के लिए ज्ञान और कौशल अर्जित करने का अधिकार है जिससे वह वस्तुओं को खरीदते समय या सेवाओं को प्राप्त करते समय सही निर्णय ले सके ।

( मानकीकरण चिह्न )  

  • मानकीकरण चिह्न वे चिह्न होते हैं जो सरकार द्वारा केवल उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर ही लगाए जाते हैं और ये उस उत्पाद की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं ।  

( आई . एस . आई . मार्क )   

  • यह बी.आई.एस. ( भारतीय मानक ब्यूरो ) का प्रमाणन चिह्न है । बी.आई. एस . को पहले आई.एस.आई. ( भारतीय मानक संस्थान ) के नाम से जाना जाता था । यह मानक चिह्न कई खाद्य पदार्थों पर पाया जाता है जैसे नमक , पैकेज्ड पेयजल संसाधित खाद्य पदार्थ , कैंडी टॉफी , बच्चों के दूध का पाउडर यह अन्य पदार्थों पर भी पाया जाता है जैसे बिजली के उपकरण , प्रेशर कुकर , साबुन , डिटेरजेंट , पेंट , कागज , सीमेंट , सरिया आदि ।  

( एगमार्क )

  • यह मार्क विपणन और निरीक्षण निदेशालय द्वारा किया जाता है । यह कृषि उत्पादों पर दिया जाता है जैसे मसाले , घी , मक्खन , तेल , आटा , बेसन आदि । 

( एफ . एस . एस . ए . आई . )  

  • एफ.एस.एस.ए.आई. अर्थात् भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधि करण , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय द्वारा दिया गया मानक चिह्न है । यह सभी खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य है जैसे - बिस्किट , चायपत्ती , कॉफी , ठंडे पेय आदि । 

( वूलमार्क ) 

  • यह अच्छी गुणवत्ता वाली ऊन या ऊनी वस्त्रों पर पाया जाता है । यह अन्तर्राष्ट्रीय ऊन सचिवालय का मानक चिह्न है । 

( सिल्कमार्क )

  • यह भारतीय रेशम मार्क संगठन ( एस.एम.ओ.आई. ) द्वारा दिया गया मानक चिह्न है जो शुद्ध रेशमी वस्त्रों पर पाया जाता है । सिल्कमार्क 100 % प्राकृतिक रेशम को सुनिश्चित करता है । 

( हॉलमार्क )  

  • यह भारतीय मानक ब्यूरो ( बी.आई.एस. ) द्वारा दिया जाता है । शुद्ध सोना , चाँदी और प्लैटिनम के आभूषणों पर पाया जाता है । 

( उपभोक्ता के दायित्व : ) 

  • उपभोक्ता सरकार द्वारा बनाए गए विभिन्न कानूनों के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाता रहे । उसे सभी सामान ( वस्तु / सेवा ) का लेन - देन ईमानदारी से करना चाहिए । 
  • कोई भी वस्तु खरीदने से पहले उसे बाजार सर्वेक्षण करना चाहिए ताकि वह सभी वस्तुओं की तुलना करके उचित चयन कर सके ।
  • उसे अपनी आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध विभिन्न किस्तों में से स्वयं चुनना चाहिए , किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए ।
  • खरीदने से पहले लेबल / ब्रोशर पर दी गई सारी जानकारी को पढ़ना चाहिए ।
  • उसे मानकीकरण चिह्न वाले उत्पाद ही खरीदने चाहिए जो उच्च गुणवत्ता के होते हैं । 
  • पक्का बिल अवश्य लें | 

( उपभोक्ता संरक्षण परिषद् )   

  • उपभोक्ता हितों की रक्षा के उद्देश्य से भारत सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो ( बी.आई.एस. ) तथा विपणन और निरीक्षण निदेशालय , भारत सरकार ( डी.एम.आई. ) जैसे कि वैधानिक , अर्ध - सरकारी और गैर - सरकारी निकायों के अतिरिक्त , केंद्रीय तथा राज्य स्तरों पर संरक्षण परिषदों की भी स्थापना की है । इनके अतिरिक्त आज कई गैर - सरकारी संगठन ( एन.जी.ओ . ) / स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन अपने गैर - पक्षीय हितों के कारण उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । 
  • ऐसे संगठन पत्रिकाओं , पुस्तिकाओं , समाचार - पत्रों , मार्गदर्शिकाओं , दृश्य - श्रव्य सामग्रियों और अनुसंधान रिपोर्ट आदि के माध्यम से उपभोक्ता हितों से जुड़ी जानकारियाँ प्रकाशित तथा प्रसारित करते है ।
  • आजकल तो बहुत से उपभोक्ता संगठन उत्पादों के तुलनात्मक परीक्षण , हानिकारक और असुरक्षित उत्पादों के बारे में उपभोक्ता जागरूकता फैलाने , उत्पादों के बारे में समझाने , उपभोक्ताओं के लिए नए वैधानिक प्रावधानों के बारे में जानकारी का प्रचार करने , मुफ्त कानूनी सलाह और पैरवी करने , उपभोक्ताओं क ी शिकायतों से निपटने के लिए सतर्कता समूहों के रूप में कार्यरत है । 
  • कई उपभोक्ता संगठन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जनसभाएँ एवं नुक्कड़ नाटक तक आयोजन करने लगे हैं । कई उपभोक्ता संगठनों ने तो अपने पुस्तकालय और दस्तावेज केंद्र भी खोल लिये हैं जिसके चलते आज यह संगठन उपभोक्ता जागरूकता , सशक्तिकरण और उपभोक्ता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं ।

( कार्यक्षेत्र ) 

  • भारतीय मानक ब्यूरो , विपणन और निरीक्षण निदेशालय , उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय आदि जैसे सरकारी संगठनों में प्रबंधकीय और तकनीको पदों पर कार्य ।
  • स्वैच्छिक संगठनों में कार्य जैसे उत्पाद परीक्षण , उपभोक्ता शिक्षण व सशक्तिकरण पत्रिका का प्रकाशन आदि । निगमित कॉरपोरेट व्यापारिक संस्थानों के उपभोक्ता प्रभाग में कार्य ।
  • बाज़ार अनुसंधान संगठनों के साथ कार्य ।
  • अपना उपभोक्ता संगठन शुरू करना ।
  • उपभोक्ता परामर्श सेवा और लोगों की शिकायतों का निवारण करने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में कार्य ।
  •  विद्यालयों और महाविद्यालयों द्वारा चलाए गए उपभोक्ता क्लबों में परामर्शदाता के रूप में कार्य । शिकायत निवारण के मार्गदर्शन के लिए स्वतंत्र परामर्शदाता के रूप में कार्य । 
  •  उपभोक्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं में उत्पादों के तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए विश्लेषणकर्ता के रूप में कार्य ।
  •  उपभोक्ता मामलों से संबंधित पत्रकारिता । 

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