आतिथ्य प्रबंधन- Class 12th ( Home science ) Chapter- 15th Term- 2

आतिथ्य प्रबंधन- Class 12th ( Home science ) Chapter- 15th Term- 2

 Introduction 

  • भारतीय सभ्यता में अतिथियों को भगवान के समान माना जाता है और उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाता है , जैसे कि “ अतिथि देवो भव " शब्द में विदित है ।
  • प्राचीन काल में प्रायः लोग अपने सम्बन्धियों या मित्रों के यहाँ या धर्मशलाओं में रुकते थे 
  • परन्तु आज के आधुनिक समय में लोगों की विभिन्न उद्देश्यों से की जाने वाली यात्राओं की संख्या में वृद्धि हुई है
  • ऐसी स्थिति में सत्कार की मूलभूत सेवाओं की व्यवस्था की आधिक आवश्यकता हो गई है ।   

( महत्त्व )

  • कुछ लोग विभिन्न स्थानों की यात्रा, विभिन्न संस्कृतियों का अनुभव करने, परम्परागत हमारतों को देखने के लिए, वन्य जीवन पर्यटन के लिए जाते हैं ।
  • लोग धार्मिक यात्राओं पर, धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए व धार्मिक उत्सवों में भाग लेने जाते हैं । 
  • आज के युग में लोग व्यापारिक उद्देश्य से भी भिन्न - भिन्न देशों की यात्रा करते हैं । 
  • चिकित्सकीय पर्यटन भी एक बढ़ता हुआ क्षेत्र है लोग दूसरे देशों में स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए यात्रा करते हैं ।
  • शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी विद्यार्थी दूसरे देशों में यात्रा करते हैं । इस प्रकार के आयोजनों / समारोहों में भाग लेने के लिए आने वाले सभी लोग ऐसे स्थानों पर रुकना चाहते हैं 
  • जो आरामदायक, सुरक्षित तथा स्वच्छ हों । इस प्रकार आतिथ्य उद्योग " एक घर से दूर घर " की सुविधा के रूप में विकसित हुआ है और यह तीव्र गति से विकसित हो रहा उद्योग हैं ।

( मूलभूत संकल्पनाएँ )

  • होटल ये बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान होते हैं जो अतिथियों को रहने का स्थान, भोजन तथा अन्य सेवाएँ प्रदान करते हैं |
  • मोटल मोटल, होटलों से छोटे होते हैं , होटल जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं और कमरे के पास पार्किंग की सुविधा प्रदान करते हैं|
  • ( लॉज ) - लॉज किराये पर स्थान प्रदान करता है, विशेष रूप से सोने के लिए और यह भी हो सकता है कि वहाँ भोजन और अन्य सेवाएँ उपलब्ध न करवाई जाएँ ।
  • सैरगाह / रिजार्ट - ये बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान होते हैं । ये सुख - सुविधा के आकर्षण के लिए जाना जाता है । यहाँ अनेक प्रकार की सुविधाएँ / खेल की सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं ।
  • सुसज्जित फ्लैट यहाँ अतिथियों की सभी अपेक्षित सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं ।
  • यहाँ पर अतिथि अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं ।
  • सुसज्जित शिविर ( कैंप ) - प्राय : ये उन लोगों का आतिथ्य प्रदान करते हैं जो ट्रैकिंग, रॉक क्लाइबिंग, राफिटिंग आदि जोखिम भरे खेलों में भाग लेते हैं । 
  • इनके अतिरिक्त आतिथ्य सेवाएँ सम्मेलनों, सभाओं, थीम पार्क, समुद्री पर्यटन आदि में प्रदान की जाती हैं । अतिथि गृह, अस्पताल, छात्रावास आदि में भी आतिथ्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं ।   

( एक संगठन के आतिथ्य प्रबंधन में सम्मिलित विभाग )

  • प्रमुख / फ्रंट कार्यालय ( Front Office ) प्रतिथि चक्र के लगभग सभी चरण फ्रंट ऑफिस के अधीन ही आते है ।
  • होटल में अतिथि का आगमन फ्रंट ऑफिस क्षेत्र में ही होता हैं और वहीं पर उसका पहली बार प्रतिष्ठान / होटल के स्टाफ / कर्मचारियों से संपर्क होता है । 
  • अतिथि और होटल / प्रतिष्ठान के बीच अच्छे संबंध विकसित करना तथा बाजार में प्रतिष्ठान की अच्छी छवि बनाने के लिए मुख्य रूप से फ्रंट ऑफिस ही जिम्मेदार होता है, इसलिए फ्रंट ऑफिस / प्रमुख कार्यालय किसी भी होटल का केंद्र बिंदु होता है ।  
  • गृह व्यवस्था विभाग ( Housekeeping Department ) गृह व्यवस्था विभाग मुख्य रूप से होटल अथवा प्रतिष्ठान के हर हिस्से की स्वच्छता को सुनिश्चित करने और साफ - सफाई के उच्चतम मानकों को बनाए रखकर स्वस्थ परिवेश प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होता है । 
  • इसके अतिरिक्त प्रतिष्ठान के सौंदर्य को बनाए रखना भी इसी विभाग की जिम्मेदारी होती है । 
  • अतिथियों का होटल में रहने तथा भविष्य में भी बार - बार उसी होटल में आने का निश्चय, मुख्यत : 
  • होटल द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की गुणवत्ता तथा होटल के कमरे की साज - सज्जा, कमरे में प्रदान की गई सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता तथा सफाई पर निर्भर करता है । 

( खाद्य तथा पेय पदार्थ विभाग ) ( Food and Beverages Department

  • खाद्य तथा पेय पदार्थ विभाग का मुख्य कार्य खाद्य तथा पेय पदार्थों का उत्पादन तथा बिक्री करना होता है । 
  • होटल या संस्थान में सभी प्रकार के रसोईघर, भोजन- कक्ष / दावतखाना, रेस्तराँ, रूम सर्विस, कॉफी शॉप तथा बार इत्यादि इसी विभाग के अंतर्गत आते है ।
  • रसोईघर ( Kitchen ) रसोईघर वह स्थान होता है, जहाँ भोजन तैयार किया जाता है । आजकल सभी बड़े होटलों में विभिन्न प्रकार के खाद्य तथा पेय पदार्थों को तैयार करने के लिए अलग - अलग अनुभाग होते है, 
  • जैसे कि- अलग बूचड़खाना, बेकरी तथा मिष्ठान भंडार, सब्जियाँ तैयार करना , सूप विभाग , पेंट्री , चूल्हे आदि के स्वतंत्र अनुभाग हो सकते हैं । 
  • हालांकि छोटे होटलों में ये सभी अनुभाग रसोईघर से ही जुड़े होते हैं । सभी बड़े होटलों तथा संस्थानों के रसोईघरों में बहुत से कर्मचारी काम करते हैं ।  
  • रेस्तराँ यह एक व्यापारिक सुविधा है जो ग्राहकों को खाद्य और पेय पदार्थ उपलब्ध करवाता है । 
  • ये खाने की मेज , कुर्सियों तथा अन्य आवश्यक फर्नीचर और साथ क्रॉकरी व लिनेन के साथ सुसज्जित होते हैं । 
  • रेस्तराँ के विभिन्न कर्मचारी प्रबन्धक सम्पूर्ण कार्य संचालन के लिए उत्तरदायी होता है ।
  • सहायक सेवा विभाग संस्थानों में कुछ अन्य विभाग होते हैं जो संस्थानों के प्रबन्धन व सुचारू रूप से कार्य संचालन के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं । इन्हें ' बँक ऑफिस ' भी कहा जाता है ।

Scope (कार्यक्षेत्र)

  •  कार्यक्षेत्र  आतिथ्य प्रबन्धन के क्षेत्र में कार्य करने वाली संगठनात्मक संरचना में निम्न पद आते हैं । शीर्ष प्रबन्धन, मध्य प्रबंधन, अवर प्रबन्धन पर्यवेक्षक तथा प्रचालन स्टाफ आते हैं । 
  • इन सभी स्तरों पर नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं ।
  • युवाओं को इस क्षेत्र में वरीयता प्राप्त होती है क्योंकि वे कई घण्टों तक कार्य कर सकते हैं ।
  • शिक्षा में प्रगति होने से अधिक जानकारी तथा अधिक सामर्थ्य होती है ।
  • वे नवीनतम प्रौद्योगिकियों तथा नए विचारों को अपनाने के लिए तत्पर रहते हैं । उनके अन्दर सफलता और अधिक पैसा कमाने की महत्त्वाकांक्षा होती हैं । 
  • आतिथ्य प्रबन्धन केवल होटल उद्योगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह छात्रावासों एवं अस्पतालों जैसे बड़े छात्रों में भी लागू होता है ।  

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